हर घर में रसोई का काम एलपीजी गैस सिलेंडर से चलता है। सुबह की चाय बनाने से लेकर शाम के खाने तक, यह हर परिवार की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। इसलिए सिलेंडर की कीमत में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे घर के बजट पर असर डालता है। लोग हर महीने नई दरों का इंतजार करते हैं, क्योंकि इससे मासिक खर्च का हिसाब लगाया जाता है।
महंगाई के इस दौर में गैस सिलेंडर की कीमत बहुत मायने रखती है। सब्जियां, दूध, दाल जैसी चीजों के दाम पहले से ही बढ़े हुए हैं। ऐसे में अगर गैस महंगी हो जाए, तो घर चलाना और मुश्किल हो जाता है। कई परिवार अपना पूरा महीने का प्लान गैस की कीमत को देखकर बनाते हैं।
एलपीजी कीमतें कैसे तय होती हैं
भारत में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें सरकार सीधे नहीं तय करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार को देखकर रेट फिक्स करती हैं। कच्चे तेल का दाम, विदेशी एलपीजी की दर और रुपया-डॉलर का रेट इसमें बड़ा रोल खेलता है। सरकार कोशिश करती है कि कीमतों में अचानक ज्यादा उछाल न आए, इसलिए कई बार दाम लंबे समय तक एक जैसे रखे जाते हैं।
घरेलू गैस का इस्तेमाल खासकर महिलाओं की जिंदगी को आसान बनाता है। उज्ज्वला योजना से गांवों और गरीब घरों तक गैस पहुंची, जिससे चूल्हे के धुएं से होने वाली परेशानियां कम हुईं। लेकिन दाम बढ़ने पर मध्यम और कम आय वाले परिवारों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है। छोटे परिवारों में भी गैस का खर्च बजट का अच्छा खासा हिस्सा ले लेता है।
बड़े शहरों में 14.2 किलो सिलेंडर के दाम
देश के मुख्य शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत अभी 850 से 880 रुपये के आसपास है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में यह थोड़ा सस्ता मिलता है, जबकि कोलकाता और चेन्नई में कुछ ज्यादा। इसका कारण राज्य के टैक्स, ट्रांसपोर्ट का खर्च और लोकल चार्ज हैं।
हर शहर में दाम अलग-अलग होने की वजह टैक्स और लॉजिस्टिक्स है। अलग राज्यों में वैट अलग होता है। सिलेंडर को गोदाम से डिलीवरी पॉइंट तक पहुंचाने का खर्च भी कीमत जोड़ देता है। इसलिए दूरदराज के गांवों या पहाड़ी इलाकों में गैस और महंगी पड़ती है।
| शहर | 14.2 किलो घरेलू सिलेंडर की कीमत (रुपये में) |
|---|---|
| दिल्ली | लगभग 853 |
| मुंबई | लगभग 852.50 |
| कोलकाता | लगभग 879 |
| चेन्नई | लगभग 870 के आसपास |
सब्सिडी की भूमिका
सरकार घरेलू ग्राहकों को सब्सिडी देती है, जो सीधे बैंक अकाउंट में जाती है। सब्सिडी की राशि समय के साथ बदलती रहती है। उज्ज्वला योजना वाले परिवारों को अतिरिक्त मदद मिलती है, जिससे गरीब घरों को थोड़ी राहत रहती है।
आने वाले समय में एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेंगे। अगर कच्चा तेल महंगा हुआ या रुपया कमजोर पड़ा, तो कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार जरूरत पड़ने पर बीच में आकर लोगों को राहत देने की कोशिश करती है।
निष्कर्ष
एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें हर घर के बजट से जुड़ी हुई हैं। ताजा दरें जानना जरूरी है, क्योंकि शहर और राज्य के हिसाब से थोड़ा फर्क पड़ता है। सब्सिडी का सही इस्तेमाल और गैस का समझकर खर्च करना महंगाई के बोझ को कुछ कम कर सकता है। सही जानकारी रखें और नजदीकी एजेंसी या कंपनी की वेबसाइट से लेटेस्ट रेट चेक करते रहें। इससे घर का हिसाब आसानी से संभाला जा सकता है।