Amazon Gift Card

पुश्तैनी संपत्ति में हक कैसे लें: बेटे-बेटियों के बराबर अधिकार – नए नियम जानिए

नमस्कार दोस्तों! भारतीय परिवारों में पुश्तैनी संपत्ति का मामला हमेशा संवेदनशील रहता है। कई बार जानकारी की कमी से लोग अपना हक खो देते हैं। लेकिन अब कानून स्पष्ट हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से नियम मजबूत हुए हैं। बेटे और बेटी दोनों को बराबर अधिकार मिलता है। यह अधिकार जन्म से बन जाता है।

यह बदलाव महिलाओं के लिए बड़ा है। पहले कई जगह बेटियों को हिस्सा नहीं मिलता था। अब कानून सबको बराबर मानता है।

पुश्तैनी संपत्ति क्या होती है

पुश्तैनी संपत्ति वह है जो चार पीढ़ियों से परिवार में चली आ रही हो। परदादा से दादा, दादा से पिता और पिता से संतान तक बिना बंटवारे के। इसमें हर सदस्य का हक जन्म से बन जाता है। अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं।

यह संपत्ति परिवार की साझा होती है। कोई एक व्यक्ति पूरी नहीं बेच सकता।

स्व-अर्जित और पुश्तैनी में फर्क

स्व-अर्जित संपत्ति वह है जो व्यक्ति अपनी कमाई से खरीदता है। इसमें बच्चों का जन्म से हक नहीं। मालिक वसीयत से किसी को दे सकता है।

पुश्तैनी में सबका हक बराबर। यह फर्क समझना जरूरी है। विवाद से बचाता है।

बेटियों को बराबर अधिकार

2005 के हिंदू उत्तराधिकार संशोधन से बेटियों को बेटों जैसा हक मिला। शादी के बाद भी हक रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बेटी का अधिकार जन्म से है। पिता के जीवन में भी बना रहता है।

यह फैसला महिलाओं को मजबूत बनाता है। परिवार में बराबरी लाता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसले दिए। बेटी को बराबर हिस्सा मिलेगा। संशोधन से पहले पिता की मौत हुई हो तब भी।

ये फैसले नियम स्पष्ट करते हैं। महिलाओं को कानूनी सुरक्षा देते हैं।

आपसी सहमति से बंटवारा

सब सहमत हों तो बंटवारा आसान। विभाजन विलेख बनाएं। रजिस्ट्री करवाएं। हर व्यक्ति अपना हिस्सा मालिक बन जाता है।

यह तरीका समय और पैसा बचाता है। विवाद नहीं होता।

सहमति न बने तो क्या करें

सहमति न हो तो कोर्ट जाएं। सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करें। कोर्ट दस्तावेज देखकर फैसला देगा।

यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है। लेकिन कानूनी और सुरक्षित है।

जरूरी दस्तावेज

हक साबित करने के लिए पुराने रिकॉर्ड रखें। राजस्व रिकॉर्ड, खसरा-खतौनी, म्यूटेशन। वंशावली दस्तावेज।

पुराने कागज न हों तो राजस्व विभाग से निकलवाएं। मजबूत दस्तावेज केस आसान बनाते हैं।

पिता पूरी संपत्ति बेच सकता है?

नहीं। पुश्तैनी संपत्ति में सबका हक है। पिता अकेले नहीं बेच सकता। सहमति जरूरी।

बिना सहमति बेची तो कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कई मामलों में बिक्री रद्द हुई है।

कानूनी सलाह क्यों लें

मामले जटिल हो सकते हैं। वकील से सलाह लें। दस्तावेज जांचेंगे। सही रास्ता बताएंगे।

समय और पैसा बचता है। गलती से बचाते हैं।

निष्कर्ष

पुश्तैनी संपत्ति में हक लेना अब आसान है। कानून और सुप्रीम कोर्ट फैसलों से नियम स्पष्ट हैं। बेटे-बेटी बराबर हकदार। सही दस्तावेज और सहमति से बंटवारा करें। जरूरत पड़े तो कानूनी मदद लें।

यह अधिकार जन्म से मिलता है। जानकारी से हक सुरक्षित रखें।

क्या आपके परिवार में ऐसा मामला है? कमेंट्स में बताएं!

Leave a Comment