केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकारों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में भी 8वें वेतन आयोग को लेकर कई सवाल हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या राज्यों के कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्र के कर्मचारियों की तरह ही इस आयोग का फायदा मिलेगा। आमतौर पर पिछले वेतन आयोगों में देखा गया है कि सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों को नई सिफारिशों का लाभ मिलता है। उसके बाद राज्य सरकारें इसे अपनाती हैं। राज्य अपने स्तर पर वेतन आयोग बनाते हैं और फैसला लेते हैं।
केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र के कर्मचारियों और पेंशनर्स को पहले फायदा होता है। राज्य सरकारें बाद में अपना निर्णय लेती हैं। वे केंद्र की सिफारिशों को पूरी तरह अपनाती हैं या कुछ बदलाव करके लागू करती हैं।
राज्य सरकारें केंद्र की सिफारिशें साथ लागू करेंगी या नहीं
कर्मचारियों में यह चर्चा है कि क्या राज्य सरकारें केंद्र के साथ ही 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करेंगी। ऐसा जरूरी नहीं है। केंद्र की सिफारिशें सबसे पहले केंद्र में लागू होती हैं। राज्य सरकारें अपनी सुविधा और स्थिति के अनुसार फैसला करती हैं। राज्यों को केंद्र की सिफारिशें मानने की कोई कानूनी मजबूरी नहीं है। वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं कि केंद्र को फॉलो करें या अपना अलग आयोग बनाएं।
पिछले अनुभव से पता चलता है कि राज्य केंद्र का अनुसरण करते हैं, लेकिन समय अलग-अलग लगता है। कोई राज्य जल्दी लागू कर देता है, तो कोई देर करता है।
केंद्र के बाद राज्यों में कितना समय लग सकता है
केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग लागू करने के बाद राज्य सरकारें अपना फैसला लेती हैं। यह राज्य की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ राज्य 6 महीने के अंदर ही नई सैलरी लागू कर देते हैं। लेकिन ज्यादातर राज्यों में अपना अलग वेतन आयोग बनता है, जिसमें 1 से 3 साल तक लग जाते हैं। पिछले वेतन आयोग में कुछ राज्यों ने 2020 तक समय लिया था।
इस बार भी यही पैटर्न दिख सकता है। राज्य अपनी बजट स्थिति देखकर फैसला करेंगे।
राज्य और केंद्र की सैलरी बढ़ोतरी एक जैसी होगी या नहीं
कोई सख्त नियम तो नहीं है, लेकिन ज्यादातर मामलों में सैलरी बढ़ोतरी काफी हद तक एक जैसी रहती है। अलग-अलग आयोग होने के बावजूद राज्य और केंद्र का वेतन ढांचा लगभग समान होता है। फिटमेंट फैक्टर में भी समानता रहती है। जैसे सातवें वेतन आयोग में केंद्र का फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। पंजाब के छठे आयोग में 2.59 और उत्तर प्रदेश में 2.57 रखा गया।
राज्य फिटमेंट फैक्टर को अपनी जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं। लेकिन कुल मिलाकर ढांचा एक सा रहता है।
नीचे एक टेबल में कुछ उदाहरण दिए गए हैं कि पिछले आयोग में फिटमेंट फैक्टर कैसे रहा:
| वेतन आयोग | केंद्र फिटमेंट फैक्टर | पंजाब (छठा आयोग) | उत्तर प्रदेश |
|---|---|---|---|
| सातवां वेतन आयोग | 2.57 | 2.59 | 2.57 |
| पिछला पैटर्न | समानता ज्यादातर | थोड़ा बदलाव | केंद्र जैसा |
यह टेबल दिखाती है कि राज्य केंद्र को काफी हद तक फॉलो करते हैं।
राज्यों को केंद्र का वेतन आयोग मानना जरूरी है या नहीं
राज्यों के लिए केंद्र के 8वें वेतन आयोग को मानना बिल्कुल जरूरी नहीं है। कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। राज्य अपनी अर्थव्यवस्था और बजट देखकर फैसला लेते हैं। वे अपना अलग राज्य स्तर का वेतन आयोग बना सकते हैं।
उदाहरण के लिए कर्नाटक में सातवां आयोग चल रहा है। पंजाब में छठा आयोग लागू है। उत्तर प्रदेश में सातवां खत्म हो चुका है और आठवां आने वाला है। केरल में 11वां वेतन आयोग चल रहा है। हर राज्य की अपनी स्थिति अलग है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर कब मिलेगा
पिछले वेतन आयोगों से तुलना करें तो एरियर पिछले आयोग के खत्म होने के अगले दिन से मिलना चाहिए। सातवें आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुआ, तो 1 जनवरी 2026 से एरियर बनना चाहिए। लेकिन अभी लागू करने की तारीख घोषित नहीं हुई है।
केंद्र के कर्मचारियों के अलावा राज्य सरकारें अपनी तारीख घोषित करेंगी, तब स्थिति साफ होगी। राज्य कर्मचारी वेतन संशोधन की प्रक्रिया से गुजरेंगे। केंद्र की तुलना में राज्य की प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो सकती है।
क्या हुआ, क्यों मायने रखता है और आगे क्या समझें
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सबसे पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलती हैं। राज्य सरकारें बाद में अपना फैसला लेती हैं और अक्सर केंद्र का अनुसरण करती हैं, लेकिन समय और बदलाव अलग हो सकते हैं। राज्यों को केंद्र मानने की कोई मजबूरी नहीं है।
यह बदलाव राज्य कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन को प्रभावित करेगा, लेकिन केंद्र से अलग समय पर। फिटमेंट फैक्टर और ढांचा ज्यादातर समान रहता है।
आगे राज्य अपनी आर्थिक स्थिति देखकर फैसला लेंगे। कुछ जल्दी लागू करेंगे, तो कुछ में देर लगेगी। कर्मचारियों को अपनी राज्य सरकार की घोषणा का इंतजार करना होगा।