ग्रामीण क्षेत्रों में नरेगा मेट का पद महत्वपूर्ण होता है। नरेगा योजना में काम करने वाले श्रमिकों की देखरेख करने वाला व्यक्ति ही मेट कहलाता है। कुछ जगहों पर इसे सुपरवाइजर भी कहा जाता है। ये पद अन्य श्रमिकों से बड़ा माना जाता है क्योंकि मेट खुद काम नहीं करता, बल्कि दूसरों से काम करवाता है और उनकी हाजिरी लगाता है।
नरेगा मेट को अन्य श्रमिकों से ज्यादा सैलरी मिलती है। ये पद ग्राम पंचायत स्तर पर होता है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का अच्छा मौका देता है। मेट बनने की प्रक्रिया आसान है और इसके लिए ग्राम पंचायत या सरपंच से संपर्क करना पड़ता है।
नरेगा मेट क्या होता है और इसका काम क्या है
नरेगा मेट कार्यस्थल पर श्रमिकों की निगरानी करता है। वो मजदूरों को काम बांटता है, उनकी हाजिरी दर्ज करता है और रिकॉर्ड रखता है। मेट खुद शारीरिक काम नहीं करता, बल्कि सुपरवाइजरी भूमिका निभाता है।
मेट मजदूरों के बीच काम का सही वितरण करता है। आमतौर पर पांच-पांच मजदूरों का ग्रुप बनाकर काम सौंपता है। वो जॉब कार्ड चेक करता है और पात्र मजदूरों को ही काम देता है। दिन भर काम का निरीक्षण करता है और जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन देता है। दिन के अंत में काम की मात्रा और प्रकार दर्ज करता है तथा हस्ताक्षर करवाता है। मास्टर रोल तैयार करके पंचायत सेवक को जमा करता है। ये काम पारदर्शी तरीके से चलाने में मदद करता है।
नरेगा मेट बनने के फायदे क्या हैं
नरेगा मेट बनने से कई सुविधाएं मिलती हैं। मेट को सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है। वो खुद शारीरिक काम नहीं करता, सिर्फ निगरानी और हाजिरी का काम करता है।
इस पद के लिए कोई परीक्षा या इंटरव्यू नहीं देना पड़ता। नौकरी अपनी ग्राम पंचायत में ही मिल जाती है। ज्यादा पढ़ाई की जरूरत नहीं, 10वीं या 12वीं पास काफी है। मेट को कार्यस्थल पर मजदूरों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिलती है। ये पद स्थानीय स्तर पर सम्मान भी दिलाता है।
नरेगा मेट बनने की योग्यता और पात्रता
नरेगा मेट बनने के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। आवेदक ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला होना चाहिए। लड़का या लड़की दोनों आवेदन कर सकते हैं।
उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए। कम से कम 8वीं से 12वीं पास होना जरूरी है, राज्य के अनुसार बदलाव हो सकता है। आवेदक का नाम जॉब कार्ड में होना चाहिए और बैंक खाता भी। स्मार्टफोन चलाना आना चाहिए क्योंकि हाजिरी और डाटा ऑनलाइन अपलोड करना पड़ता है। स्मार्टफोन रखना भी जरूरी है।
जरूरी दस्तावेजों की सूची
आवेदन के लिए कई दस्तावेज लगते हैं। मनरेगा जॉब कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी।
10वीं की मार्कशीट, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर। पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो। कम से कम 40-50 जॉब कार्ड धारकों के जॉब कार्ड। आवेदन पत्र। स्मार्टफोन हाजिरी के लिए।
| दस्तावेज | जरूरत क्यों |
|---|---|
| मनरेगा जॉब कार्ड | पात्रता साबित करने के लिए |
| आधार कार्ड | पहचान और लिंकिंग के लिए |
| बैंक पासबुक | सैलरी ट्रांसफर के लिए |
| 10वीं मार्कशीट | योग्यता प्रमाण के लिए |
| पासपोर्ट फोटो | आवेदन के साथ लगाने के लिए |
| 40-50 जॉब कार्ड | अंडर में मजदूरों के लिए |
| स्मार्टफोन | हाजिरी और डाटा अपलोड के लिए |
ये टेबल मुख्य दस्तावेज दिखाती है।
आवेदन की प्रक्रिया कैसे पूरी करें
नरेगा मेट के लिए आवेदन ऑफलाइन होता है। ग्राम पंचायत या तहसील कार्यालय जाएं। वहां से आवेदन फॉर्म लें।
फॉर्म में सभी जानकारी सही भरें। जरूरी दस्तावेजों की कॉपी लगाएं। सरपंच या ग्राम सेवक से संपर्क करें। फॉर्म जमा कर दें। एक सप्ताह में मोबाइल पर यूजर आईडी और पासवर्ड मिल जाता है। इससे मजदूरों का डाटा अपलोड कर सकते हैं। 15 दिन के काम के लिए मस्टर रोल मिलता है।
नरेगा मेट की सैलरी कितनी मिलती है
नरेगा मेट को अन्य श्रमिकों से ज्यादा सैलरी मिलती है। 2026 में ये 220 से 400 रुपये प्रतिदिन तक हो सकती है।
सैलरी राज्य के अनुसार अलग-अलग है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों का योगदान होता है। कुछ राज्यों में ज्यादा बढ़ोतरी की जाती है। मेट को सेमी-स्किल्ड माना जाता है इसलिए ज्यादा दर मिलती है।
नरेगा मेट आईडी कैसे बनवाएं
नरेगा मेट आईडी के लिए ग्राम पंचायत या तहसील में आवेदन करें। सरपंच या ग्राम सेवक से संपर्क करें।
आवेदन के बाद एक सप्ताह में मोबाइल या ईमेल पर आईडी की जानकारी आ जाती है। इससे डिजिटल हाजिरी और डाटा अपलोड होता है। आईडी से काम पारदर्शी रहता है।
फॉर्म PDF कैसे डाउनलोड करें
नरेगा मेट फॉर्म PDF राज्य की नरेगा पोर्टल या मुख्य वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। डॉक्यूमेंट्स या फॉर्म्स सेक्शन में जाएं।
नरेगा मेट हेतु आवेदन पत्र पर क्लिक करें। PDF डाउनलोड हो जाएगा। प्रिंट करके भरें।
निष्कर्ष
नरेगा मेट कार्यस्थल पर मजदूरों की देखरेख करता है, हाजिरी लगाता है और रिकॉर्ड रखता है। आवेदन ग्राम पंचायत में ऑफलाइन होता है और सैलरी अन्य श्रमिकों से ज्यादा मिलती है।
ये मायने रखता है क्योंकि स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता है। आगे चलकर इच्छुक लोग दस्तावेज तैयार रखें और ग्राम पंचायत से संपर्क करें ताकि आवेदन आसानी से हो सके।