नमस्कार दोस्तों! आयुष्मान भारत योजना को और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब नए आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए आधार ई-केवाईसी जरूरी हो गई है। यह कदम फर्जी कार्ड रोकने और सही लाभार्थियों तक मदद पहुंचाने के लिए है। पहले दस्तावेजों से कार्ड बन जाते थे, लेकिन अब डिजिटल वेरिफिकेशन अनिवार्य है।
यह बदलाव योजना को पारदर्शी बनाता है। फ्रॉड की शिकायतें कम होंगी। असली जरूरतमंदों को फायदा मिलेगा।
BIS 2.0 से बेहतर पहचान
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने BIS 2.0 सिस्टम शुरू किया है। यह पुराने सिस्टम से ज्यादा तेज और सटीक है। आधार से रीयल टाइम वेरिफिकेशन होता है। गलत जानकारी से कार्ड बनना मुश्किल हो गया है।
परिवार में नए सदस्य जोड़ने के नियम
पहले नए सदस्य आसानी से जोड़े जाते थे। अब यह सीमित है। सिर्फ SECC 2011 लिस्ट में छूटे परिवारों में ही नए सदस्य जोड़े जा सकते हैं। इससे योजना का दुरुपयोग रुकता है। डेटा सही रहता है।
संदिग्ध कार्डों पर नजर
स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट पोर्टल से संदिग्ध कार्ड चेक होते हैं। जानकारी मेल न खाने पर जांच होती है। कई कार्डों की फील्ड जांच चल रही है। जिलों में अधिकारी रिपोर्ट भेज रहे हैं।
AI और सॉफ्टवेयर की मदद
NHA अब AI और ऑटोमेटेड टूल्स इस्तेमाल कर रहा है। संदिग्ध कार्ड खुद पता चल जाते हैं। इलाज अस्थायी रोक दिया जाता है। जांच के बाद सही कार्ड फिर सक्रिय हो जाते हैं। इससे समय बचता है।
जांच तेज चल रही
2018 से बने कार्डों की समीक्षा हो रही है। हजारों संदिग्ध कार्ड मिले हैं। जिला स्तर पर फील्ड जांच हो रही है। भौतिक वेरिफिकेशन भी किया जा रहा है।
फ्रॉड पर सख्त एक्शन
गलत पाए जाने पर कर्मचारी या एजेंसी पर कार्रवाई होती है। कुछ मामलों में कर्मचारियों को हटाया गया है। यह दूसरों को चेतावनी देता है।
लाभार्थियों के लिए मतलब
प्रक्रिया थोड़ी लंबी लग सकती है। लेकिन फायदा सही लोगों को मिलेगा। आधार से पहचान पक्की होगी। फ्रॉड कम होगा। अस्पताल में वेरिफिकेशन आसान बनेगा।
योजना मजबूत होगी
आयुष्मान भारत का लक्ष्य हर जरूरतमंद को फ्री इलाज देना है। नए नियम, AI और निगरानी से यह लक्ष्य बेहतर पूरा होगा। लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
यह बदलाव योजना को मजबूत बनाते हैं। सही लाभार्थी तक मदद पहुंचेगी।
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